गरीब की प्रेणादायक कहानी - motivation hindi stories - amjoys - हिंदी कहानीया

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Wednesday, December 11, 2019

गरीब की प्रेणादायक कहानी - motivation hindi stories

story for motivation in hindi

हेलो दोस्तो आज मैं आपके लिए बहुत ही अच्छी और बहुत ही सच्ची motivation hindi stories लेकर आया हूं जिसे पढ़कर आप बहुत ही Motivate हो जाएगे।

story for motivation in hindi Start

तो यह motivation hindi stories की शुरुआत होती है गांव में रहने वाले एक छोटे से बच्चे से,
जिसका नाम था मंगू , मंगू की उम्र सिर्फ 10 साल थी। मंगू पढ़ने लिखने में हमेशा होशियार था और हमेशा स्कूल में अव्वल आता था, मंगू के घर की परिस्थिति बहुत ही खराब थी, इसलिए उसको पढाई आधी छोड़नी पड़ी, मंगू 5 वि कक्षा तक ही पढ़ सका उसको आगे पढ़ना था लेकिन क्या करें घर की परिस्थिति बहुत ही खराब थी इसलिए वह पढ़ नहीं सका।
मंगू के घर में कुल 3 जन रहते थे एक मंगू और उसके मम्मी पप्पा, और मंगू के पापा के पास खुद का घर भी नहीं था वह अपने परिवार के साथ किराए के घर पर रहते थे, मंगू की उम्र बेशक कम थी, लेकिन वो बहुत ही समजदार था।
एक दिन मंगू की मम्मी बीमार हो गई और मंगू और उनके पापा बहुत ही टेंशन में आ गए क्योंकि उनके पास पैसे थे नहीं, और मंगू की मम्मी के इलाज का खर्चा कम से कम 10000 लग रहा था वह टेंशन में आ गए कि हम 10,000 इतने सारे पैसे हम लाए कहां से।
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motivation hindi stories - MANGU

फिर मंगू के पापा ने मंगू को कहा मंगू तुम टेंशन मत लो मैं अपने बड़े यानी कि तुम्हारे दादा को फोन करता हूं शायद वह हमारी मदद कर दे मंगू बोला ठीक है पापा आप जल्दी से दादा जी को फोन कीजिए, फिर मंगू के पापा ने उनके बड़े भाई को फोन किया और यह पूरी बात बतायी कि मुझे 10000 रूपये की जरूरत है आप हमारी मदद करेंगे तो उनके बड़े भाई ने साफ साफ मना कर दिया पैसे देने से, यह सुनकर मंगू के पापा बहुत ही निराश हो गए और फोन रख दिया फिर मंगू ने अपने पापा से पूछा कि पापा क्या हुआ दादा जी हमारी मदद कर रहे है या नहीं।
यह सुनकर मंगू के पापा बोले नहीं बेटा दादाजी के पास भी पैसे नहीं है इसलिए उन्होंने मना कर दिया रुको मैं किसी और को फोन करके पूछता हूं।

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फिर मंगू के पापा ने उनके बहुत सारे दोस्तों को फोन किया अपने relatives को फोन किया लेकिन सब ने मना कर दिया,किसी ने मदद नहीं की ,मदद इसलिए नहीं की क्योंकि उनको पता था कि वह पैसे वापस नहीं दे पाएंगे।
फिर मंगू ने अपने पापा वापस पूछा कि पापा क्या हुआ पैसे का बंदोबस्त हुआ कि नहीं, यह सुनकर मंगू के पापा फिर से निराश होकर बोले बेटा अभी तक पैसे का इंतजाम नहीं हुआ अब एक आखरी उम्मीद है मेरे पुराने दोस्त जयेश भाई शायद वह हमारी मदद कर दे,में अभी उनको फोन करता हूं, मंगू बोला हां पापा आप जल्द ही जयेश काका को फोन कीजिए वह हमारी मदद पक्का करेंगे, फिर मंगू के पापा ने जयेश भाई को फोन किया, और यह सब पूरी बात बताई जयेश भाई बोले आप टेंशन मत लीजिए मैं आपको पैसे की मदद करूंगा अरे आप मेरे पुराने नहीं दोस्त है, आप मेरी ऑफिस में आकर पैसे ले जाइए, फिर मंगू के पापा जयेश भाई की ऑफिस में गए और पैसे लेकर आए,और तुरंत ही मंगू की मम्मी को एक अच्छे से डॉक्टर के पास ले गए और अच्छी तरह इलाज करवाया और देखते ही देखते मंगू की मम्मी 6 या 7 दिनों में ठीक हो गई।

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लेकिन मंगू को उसके रिलेटिव्स पर बहुत ही गुस्सा आ गया था,क्योंकि किसी ने उसकी मदद नहीं की, फिर मंगू को थोड़ी थोड़ी बात समझ में आई कि पैसे है तो सब है पैसे नहीं है तो कोई भी नहीं है, फिर मंगू ने मन ही मन निश्चय कर लिया कि अब मैं भी पैसा कमाउंगा और खुदका का घर बनाऊंगा।
फिर मंगू किसी जगह पर काम पर लग गया और वहां 1 साल काम किया और पैसे बचाएं, फिर मंगू ने जो पैसे बचाए थे,वह पैसे मैं मंगू ने अपना एक खुद का बिजनेस शुरू किया, और वह बिजनेस बुरी तरह से फेल हो गया, यह देखकर मंगू के relatives हंसने लगे और मंगू के पापा और मंगू के मम्मी का मजाक उड़ाने लगे की, आपका बेटा पागल हो चुका है उसको दिमाग है ही नहीं,सारा पैसा बिजनेस में डाल दिया और बिजनेस फेल हो गया ऐसा कह कर,  सब लोग मंगू के पापा पर हंसने लगे यह सब मंगू देख रहा था,लेकिन मंगू यह सब देखकर निराश नहीं हुआ, क्योंकि मंगू ने निश्चय किया था कि मैं पैसा कमाउंगा ही,कैसे भी करके।

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फिर मंगू वापस 1 साल के लिए कहीं पर नौकरी के लिए लग गया और पैसे जुटाने लग गया,फिर मंगू ने बचाये हुए पैसे से वापस अपना नया बिजनेस शुरू किया,यह देखकर मंगू के relatives मंगू को कहने लगे कि मंगू तुम फिर से मरोगे पहला Business भी फेल हो गया था,और यह business भी फेल हो जाएगा, इतना कहकर सब लोग हंसने लगे,ऐसी बात सुनकर मंगू को बहुत ही गुस्सा आता था लेकिन मंगू इन सब बात को इग्नोर कर डाला और अपना दूसरा बिजनेस डाल दिया, लेकिन नसीब ख़राब होने के कारण मंगू का दूसरा बिजनेस भी बुरी तरह फेल हो गया यह देखकर उनके relatives और ज्यादा खुश होने लगे,और मजाक उड़ाने लगे।

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फिर मंगू ने मन ही मन निश्चय किया कि मैं 18 साल की उम्र में एक सक्सेसफुल बिजनेस मैन बन कर ही रहूंगा,अभी मेरी उम्र 12 साल है अभी 6 साल में कुछ ना कुछ तो ऐसा कर ही लूंगा कि मुझ से मेरे मम्मी पापा को खुश हो जाए।
फिर मंगू ने वापस नौकरी की वापस पैसे जुटाए वापस बिजनेस डाला वापस उसके relatives ने उसका मजाक उड़ाया,और वापस business बुरी तरह फेल हो गया।
ऐसा मंगू ने पांच से छह बार किया लेकिन मंगू को सफलता मिली ही नहीं, मंगू ने पहले निश्चय किया था कि मैं 18 साल की उम्र में एक सक्सेसफुल बिजनेसमैन बन कर दिखाऊंगा लेकिन वह 18 साल की उम्र में सक्सेसफुल बिजनेस मेन नहीं बन पाया,अभी उसकी उम्र 19 साल है।
इसीलिए मंगू हार मान चुका था क्योंकि उसने आठ से 9 बार अपना खुद का बिजनेस शुरू किया,लेकिन हर बार उसका बिजनेस फेल ही हो गया लेकिन उसने कहीं पर पढ़ा था,कि " "हिम्मत से हारना लेकिन कभी हिम्मत मत हारना"।

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फिर मंगू ने वापस नौकरी की वापस पैसे जुटाए वापस अपने बचे हुए पैसे बिजनेस में डाले वापस उसके relatives ने उसका मजाक उड़ाया और वापस मंगू का बिजनेस फेल हुआ ,ऐसा 2 बार हुआ।
अब मंगू की उम्र 21 साल हो चुकी थी मंगू अब आखरी उम्मीद से फिर से अपना नया बिजनेस शुरू करना चाहता था,
फिर मंगू ने वापस नौकरी की वापस पैसे जुटाए वापस अपने बचे हुए पैसे बिजनेस में डाले वापस उसके relatives ने उसका मजाक उड़ाया, लेकिन इस बार मंगू का बिजनेस फेल नहीं हुआ अच्छे से चल गया यह देख कर उसके रिलेटिव्स बहुत नाराज हो रहे थे मतलब कि उसके रिलेटिव्स को अच्छा नहीं लग रहा था,
जैसे-जैसे सबको पता चलने लगा कि मंगू का बिजनेस ठीक तरह से चलने लगा है वह सब मंगू के पास आए,और मंगू को बोलने लगे की मंगू तुम यह बिजनेस रहने दो,वरना बुरी तरह फेल हो जाओगे ऐसा कहने लगे सारी बकवास बातें।

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लेकिन मंगू ने किसी की बात नहीं सुनी उसने अपना बिजनेस शुरू ही रखा,और धीरे धीरे उसका बिजनेस बहुत ही बढ़िया चलने लगा,और मंगू को बहुत ही अच्छा प्रॉफिट होने लगा।
यह सब मंगू के रिलेटिव को अच्छा नहीं लग रहा था,क्योंकि मंगू उनसे आगे चला जा रहा था। लेकिन मंगू किसी के साथ भी खराब व्यवहार नहीं करता था, मंगू बुरे व्यक्ति के साथ भी अच्छा व्यवहार करता था और गरीब आदमी के साथ भी अच्छा व्यवहार करता था, उसको अपने बिजनेस का जरा सा भी घमंड नहीं था।
फिर मंगू ने देखते ही देखते अपना खुद का नया घर ले लिया और अपने नए घर की खुशी में सारे दोस्त और अपने सारे रिलेटिव्स को पार्टी भी दी यह देखकर सब ईर्ष्या बहुत करते थे लेकिन इस बात से मंगू को कोई भी फर्क नहीं पड़ता था।
 फिर धीरे-धीरे सारे रिलेटिव और सारे मंगू के दोस्त मंगू के घर बैठने आने लगे और खाना भी मंगू के घरे खा लेते थे, जो लोग मंगू के घर का पानी तक नहीं पीते थे वह आज मंगू की सफलता को देखकर उसके घर खाना भी खाते हैं,
और वह कहते हैं ना
"समय समय की बात है समय सबका बदलता है आज तेरा है तो कल मेरा होगा, तू अपने समय पर घमंड कर रहा था लेकिन मैं अपने समय पर घमंड नहीं करता,
आप जब भी मन से बुरी तरह टूट चुके हो तब यह बात याद रखना कि कचरे की भी जगह बदलती है तो फिर मैं तो इंसान हूं मेरी जगह भी बदलेगी"

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फिर मंगू ने देखते ही देखते अपना बिजनेस बहुत ही बड़े लेवल पर खड़ा कर दिया और मंगू ने अपना घर तो लिया ही था लेकिन उसने अपनी एक नई फोर व्हील कार भी ली।
यह देखकर मंगू के मम्मी पापा भी बहुत ही खुश थे, फिर मंगू ने वह जयेश भाई ₹10000 देने थे वह भी दे दिए व्याज के साथ,
फिर मंगू ने सोचा कि मैं तो नहीं पढ़ पाया हमारी खराब परिस्थिति के कारण लेकिन जिस भी बच्चे को पढ़ाई करनी है मैं उन्हें जरूर पढ़ाऊंगा,फिर मंगू ने एक छोटा सा NGO भी शुरू किया, और सब गरीब बच्चों को पढ़ाने लगा।
फिर एक बार मंगू के रिलेटिव ने मंगू के पास पैसे मांगे मंगू ने पैसे दे भी दिए,मंगू ने यह नहीं सोचा कि उसने मुझे पहले पैसे नहीं दिए थे इसलिए मैं भी उन्हें पैसे नहीं लूंगा,मंगू बहुत ही अच्छा था वह सब की मदद करने लगा उसको उसकी सफलता का बिल्कुल घमंड नहीं था।
" घमंड तो उसे होता है जिसे अपने बाप की दौलत मिली होती है अपने दम पर कमाए हुई दौलत पर कोई घमंड नहीं करता "

पहले के दिन और आज के दिन में फर्क क्या है ये आपको यह कहानी पढ़कर पता चल जाएगा

मंगू को अब दुनियादारी समझ में आ गई थी कि,पैसा है तो सब है पैसा नहीं है तो कुछ भी नहीं है।
मंगू के मम्मी पापा भी मंगू पर गर्व महसूस करते लगे, की मेरा बेटा ईमानदारी से पैसे कमा रहा है, फिर देखते ही देखते मंगू के मम्मी पापा ने मंगू की शादी करा दी एक अच्छी सी लड़की देख कर,
फिर क्या सब अपना सुखी जीवन बिताने लगे
और उसका आनंद लेने लगे।
फिर एक दिन मंगू अपनी ऑफिस में गया, और मंगू ने सुना कि उसके employee रमेश भाई को तुरंत ₹8000 की जरूरत है, फिर मंगू ने रमेश भाई को अपनी केबिन में बुलाया और कहा यह लीजिए ₹8000,रमेश भाई बोले लेकिन सर यह ₹8000 किस बात के, मंगू बोला रमेश भाई मैं 2 महीने से आपको देख रहा हूं आप बहुत ही अच्छे से काम कर रहे है मुझे आपके काम से बहुत खुशी मिली इसलिए मैं आपको बोनस के तौर पर ₹8000 देना चाहता हूं, इस सुनकर रमेश भाई बोले शुक्रिया आपका, मंगू बोला अरे कोई बात नहीं employee का ध्यान रखना यह तो मेरा फर्ज है।
ऐसे करके मंगू ने रमेश भाई की मदद कर दी।

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यह कहानी से हमें सीख मिलती है कि आप जितनी बार फेल होगे आपको उतनी ही ज्यादा सफलता मिलेगी अगर आप फेल नहीं हुए इसका मतलब यह है कि आपने कुछ नया करने की कोशिश ही नहीं,
सक्सेसफुल इंसान सामने से आ रहे पत्थरों को कैच करके दीवार खड़ी कर देता है और अनसक्सेसफुल इंसान सामने से आ रहे पत्थर के चोट को सहन कर के रोने लगता है यह फर्क  है सक्सेसफुल इंसान और अनसक्सेसफुल इंसान में।
आपने कहानी में पढ़ा होगा की मंगू बिजनेस में कितनी बार फेल हुआ लेकिन मंगू business करता ही गया और अंत में सफलता उसके पैरों तले आ ही गई।
मुश्किलों से मत घबराओ मुश्किलों काम सामना करो।
"जमाना क्या कहेगा ये मत सोचो अगर यह भी आप सोचोगे तो जमाना क्या सोचेगा"

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छोटी-छोटी बातों पर खुश हो ना सीखो छोटी-छोटी बातों पर जश्न मनाना सीखो जिंदगी एक बार मिलती है खुल के जियो, और सब को खुश करने की कोशिश मत करो क्योंकि कोई ना कोई तो तुमसे दुखी हो ही जाएगा इसलिए बेवजह निराश होना भी बंद कर दो।
और श्रीमद् भगवद गीता  में लिखी हुई एक बात हमेशा याद रखना कि " हिम्मत से हारना लेकिन कभी हिम्मत मत हारना "।
और हमेशा अच्छे इंसान बनकर ही रहना सबकी मदद करना, और किसी की मदद तुम ना कर पाऊं तो बेवजह उसे दुखी भी मत करना,यही जीवन है।

और ऐसे ही हमारी motivation hindi stories यहां पर खत्म होती है आप कमेंट कर के हमें जरूर बताइएगा कि आपको हमारी यह motivation hindi stories कैसी लगी अगली कहानी में फिर मिलेंगे तब तक के लिए "अलविदा"
और यह कहानी अपने सारे दोस्तों और सारे परिवार को share भी कर दीजिएगा।

                                 कहानी पढ़ने के लिए धन्यवाद

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