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Friday, December 6, 2019

घर-घर की कहानी - Family story in hindi

Family story in hindi

Hello dosto, आज में आपके लिए बहुत ही अच्छी Family story in hindi की कहानी लेकर आया हु जिसे पढ़कर आपको जीवन का सही सबक मिलेंगा।

Family story in hindi start

तो ये Family story in hindi कहानी की शरुआत होती है,एक middle class परिवार से बड़ा ही अच्छा,ईमानदार और सुखी परिवार था,किसीका का बुरा नहीं करते,और ना ही बुरा सोचते,
उस परिवार में कुल चार सदस्यों थे,आरोही,मेहुल और उनके माता-पिता,माता का नाम कोकिला बेन और पिता का नाम मनसुख भाई था।
मेहुल,आरोही से तीन साल बडा था,मेहुल engineering की पढाई कर रहा था,और मेहुल की बहन आरोही 10 वि class में थी,दोनों पढाई में हमेशा अव्वल आते थे,मेहुल को उसके पापा मनसुख भाई ने एक फोन दिलवा दिया,ये देखकर आरोही भी बोली पापा मुझे भी भाई जैसा फोन लेना है,please दिलाइये ना, फिर मनसुख भाई ने अपनी बेटी को समजाया की देखो बेटा, मेहुल तुमसे बड़ा है,और उसको फोन की जरूरत भी है,इसीलिए मेने उसको दिलाया।
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अभी तुम्हारी boards की exam है,ना तुम clear करलो फिर में तुम्हे पक्का मेहुल से बढ़िया smart फोन दिलवा दूंगा खुश,फिर आरोही जैसे तैसे करके अपने पिता की बात मान लेती है,और पढाई करने लगती है।
लेकिन आरोही की कुछ दोस्त अच्छी नही थी,मतलब की आरोही की दोस्त बहुत ही गन्दी गन्दी बात किया करती थी।
लेकिन मेहुल के दोस्त ऐसे बिलकुल नही थे,सब अच्छी बातें करते थे और सबकी help भी करते थे,मेहुल के पास smart फोन था लेकिन वो उसमे कोई भी फालतू की game खेल कर अपना time vest नही करता था,क्योकि उसे पता था,time is money
मेहुल को अपने college lecture में कुछ समझ में नही आता तो,वह youtube search मार कर वो टॉपिक सिख लेता था,इस तरह internet का भी सही उपयोग करता था,मेहुल।
फिर मेहुल की बहन आरोही की 10 वि boards की एग्जाम आ गयी,मेहुल उसे छोड़ने और लेने अपनी bike में जाता था।
फिर थोड़े महीने बाद आरोही का result आया ,और आरोही फुल्ली पास हो गयी ये देखकर सब बहुत ही खुश थे,
रातको आरोही के पसंद खाना भी बनवाया,और मनसुख भाई ने आरोही को exam से पहले वादा किया था,की में तुम्हे मेहुल से भी बढ़िया smart फ़ोन दिलवा दूंगा।

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फिर मनसुख भाई ने एक बढ़िया सा smart फ़ोन आरोही को दिलवा दिया,ये देखकर आरोही बहुत ही खुश थी।
आरोही ने mobile की जिद इसलिए की थी,क्योकि उनकी सारी दोस्तों के पास फ़ोन थे,इसलिए आरोही ने भी फ़ोन लिया,
आरोही के पास फोन आने के बाद आरोही पूरा दिन फोन में online ही रहती थी,कभी whatsapp, कभी facebook और कभी youtube पढ़ने में ध्यान ही नही लगता था,आरोही का रातको बारा-बारा बजे तक फ़ोन में कुछ ना कुछ करती रहती थी,
एक दिन आरोही का भाई मेहुल ने आरोही को आधी रातमे किसी के साथ फोन में बात करके देखा,ये देखकर मेहुल बोला आधी रातको किस्से बात कर रही हो,आरोही ने जूठ बोल दिया की पता नही भैया कोई wrong number था,ये सुनकर मेहुल बोला ठीक है अब तुम फोन रखो और सो जाओ,आरोही बोली हा भैया।

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फिर सुबह होती है,मेहुल ने आरोही से फिरसे पूछा की कौन था,वो wrong number वाला,आरोही बोली वो तो पता नही भैया,ये सुनकर मेहुल बोला तुम अपनी दोस्तों और हमारे relative के अलावा किसीको अपना नम्बर मत देना ठीक,आरोही बोली ठीक है भैया में अपना नम्बर किसीको नही दूंगी,मेहुल बोला और तुम पढाई में भी ध्यान दो,जब से फोन आया है,तब से सिर्फ फोन-फोन-फोन आगे से मुझे पढाई में अच्छे number चाहिए,आरोही बोली ठीक है भैया,अब में school जाऊ, मेहुल बोला हां जाओ,चलो में भी college निकलता हूं।
फिर दोनों college और school जाने के लिए निकल जाते है।
फिर रात होती है,रातको आरोही फ़ोन पर किसीके साथ चेटिंग कर रही थी तब मेहुल मेहुल उसे देख लेता है,मेहुल बोला आरोही तुम अभी तक सोयी नही चलो सो जाओ वरना तुम्हारा फोन ले लूंगा,और तुम्हे कभी वापस नहीं दूंगा,आरोही बोली भैया सो जाती हूं,फिर आरोही सो जाती है।
फिर सुबह हुई मेहुल ने आरोही का फोन चुपके से चेक किया,और तब मेहुल को पता चला की आरोही एक लड़के के साथ बात कट रही है,और उस चेटिंग में बहुत ही गंदी गन्दी बाते लिखी थी ये देखकर मेहुल भी शर्मा गया ऐसी गन्दी बाते लिखी थी।

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ये बात मेहुल ने अपने पापा को बताई,मेहुल बोला पापा ये आरोही आधी रात तक किसी लड़के से बात कर रही होती है,ये सुनकर मनसुख भाई ने आरोही का फोन चेक किया,लेकिन उस फोन में कुछ नही निकला,क्योकि सब आरोही ने डिलीट मार दिया था,फिर मनसुख भाई ने मेहुल को डाटा,ये देखकर मेहुल बहूत ही गुस्सा हो गया,आरोही के मम्मी और पापा मेहुल और आरोही पर ज्यादा ध्यान नही रखते थे,क्योकि उनको लग रहा था,की हमारे बच्चे कोई भी गलत काम नही करेंगे,लेकिन सबकुछ उल्टा होता है,मेहुल तो समझदार ही था,उसको पता था कि मुझे क्या करना है,और क्या नही करना,लेकिन आरोही को ऐसा बिल्कुल पता नही था,की मुझे क्या करना है और क्या नहीं।
आरोही रोज रातको 12 से 1 बजे तक फ़ोन में ही लगी रहती थी,फिर एक बार मनसुखभाई आरोही को देख गए,और बोले आरोही बेटा तुम अभी तक फ़ोन ही देख रही हो,चलो सो जाओ आधी रात हो गयी है,फिर आरोही अपने पापा को कहती है,की पापा आप सो जाइये,में सो जाऊंगी, ये सुनकर मनसुखभाई वापस सो जाते है।

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फिर सुबह आरोही जागते ही अपने फोन को देखने लगी, whatsapp और facebook और दूसरी बहोत सारी apps ये देखकर मनसुख भाई बेहद ही गुस्सा हो गए,और तुरन्त ही अपनी बेटी आरोही के पास से उसका फ़ोन छीन लिया,और बोले आज से में तुम्हे ये फ़ोन नहीं दूंगा,कल से में देख रहा हु,जब देखो तब फोन फोन फोन,आज से सिर्फ तुम पढाई ही करोगी,अब तुम्हे फोन नहीं मिलेगा,नाहकर पढाई करने बेठो,फिर आरोही की शक्ल रोने जैसी हो जाती है,और पढाई करने बेठ जाती है।फिर धीरे-धीरे आरोही की दोस्त भी आरोही घर पढाई करने आने लगी,लेकिन सब पढाई नही करते थे,डायरी लिखते थे,डायरी का मतलब उसके साथ क्या हुआ और क्या नही और सब बकवास बाते,
एक दिन वो डायरी उसके भाई मेहुल ने पढ़ ली,
उस डायरी में लिखा था,की what is love and how to trust for any one ऐसी बकवास बकवास बाते लिखी थी,मेहुल को ये डायरी पढ़कर बहुत ही शर्म आयी और आरोही को वो डायरी दिखाई,और बोला ये सब क्या तुम school पढ़ने जाती हो या ये सब करने,आरोही बोली क्या मतलब है तुम्हारा,मेहुल बोला इस डायरी में ये सब क्या लिखा है,आरोही बोली ये डायरी मेरी नही है,मेरे दोस्त मनाली की है।

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ये सुनकर मेहुल बोला तुम उस मनाली के साथ रहना छोड़ दो बिलकुल अच्छी लड़की नहीं है वो,मुझे बिलकुल नही पसंद,एसङ्कर आरोही बोली तुम अपना काम करो,ये सुनकर मेहुल बहुत ही गुस्सा हो गया,और दीवार पर हाथ मारके कॉलेज चला गया।
फिर थोड़े महीनो के बाद मेहुल,आरोही और उनके मम्मी-पापा मनसुख भाई और कोकिला बहन किसी काम से अपने शहर से मुम्बई जाने की पैकिंग कर रहे थे,तभी मनाली की वो डायरी आरोही अपने बैग में दाल रही थी,तभी कोकिला बेन उस डायरी को देख गए,और बोले की आरोही ये डायरी कैसी है,और तुम इसे मुम्बई क्यों ले रही हो,आरोही बोली मम्मी ये मेरे दोस्त की डायरी उसने मुझे सम्भाल कर रखने के लिए कहा था,मेहुल चाहता तो उस वक्त उसके मम्मी को बता देता की इस डायरी में क्या लिखा है,लेकिन मेहुल ने नही बताया क्योकि मेहुल उसकी और माता-पिता की journey बिगाड़ना नही चाहता था,इसीलिए मेहुल चुप ही रहा,
फिर कोकिला बेन बोले लाओ मुझे पढ़ने दो इसमें क्या लिखा है,
तभी वहां उसके पदोश वाले रेखा बेन आ गए और बात-चित्त में मशगूल हो गए,तभी आरोही ने चुप-चाप वो डायरी छुपा दी,ताकि कोई पढ़ ना पाए,लेकिन बदनसीब से मेहुल ने सब कुछ
पढ़ लिया था,वो सिर्फ सही समय का मौका देख रहा था,फिर पूरा परिवार मुम्बई के लिए रवाना हो जाता है।

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और अंत में finally मुम्बई पहोच जाते है,और थोड़ा बहुत मुम्बई में अपना व्यवहारिक काम निपटा देते मनसुख भाई फिर पूरा परिवार मुम्बई दर्शन के लिए निकल जाता है,और बहुत घूमते फिरते है,खाते है पीते है और मौज करते है,फिर रात होती है,मेहुल ने आरोही का बैग चेक किया और उस बेग के सबसे last वाले खाने में से एक चिट्ठी निकली,मेहुल ने वो चिठ्ठी पढ़ी और शर्म से बेहाल हो गया,और मेहुल को हँसी भी आ रही थी,ऐसा-ऐसा इस चिट्ठी में लिखा और वो भी इस छोटी सी उम्र में
उस चिठ्ठी में लिखा था कि,
He - तुम ठीक तरह से सोई,
She - हां थोड़ी सी सोई,
He - ठीक है,कोई बात नही तुमने खाना खाया,
She - हां थोड़ा सा,
He - तुम सब थोड़ा थोड़ा ही करती हो,ज्यादा क्या करती हो,
She - आपसे प्यार,☺☺☺☺
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ऐसी ऐसी बाते लिखी थी उस चिठ्ठी में और इतना ही नही उस पिछले खाने में और भी बहोत सारी चिठ्ठी या थी,मेहुल ने एक के बाद एक साड़ी चिठिया पढ़ी और हँस-हँस कर लोट पॉट हो गया,और सोचने लगा की हमारी बेन गलत रास्ते जा रही है,पापा को लगता है कि आरोही पढ़ने जा रही है,लेकिन इससे बिलकुल उल्टा होता है,आरोही ऐसा इसलिए कर रही थी,क्योकि वो जिसके साथ रह रही थी मनाली वो लड़की बिलकुल ही अच्छी नही थी,

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वो कहते है ना " हम जिनके साथ रहते है,हम उनिके जैसा बर्ताव करने लगते है "

फिर मेहुल ने सोचा की अब तो हमारी छोटी बहन को सबक सिखाना ही पड़ेगा,बहोत ही ज्यादा प्यार के बारे में जानती है,घर जाने के बाद सबक सिखाऊंगा,अब तो हम मुम्बई ,दिल खोल कर सपनो के शहेर मुम्बई को देख लेते है,
फिर पूरी family 1 week मुम्बई घूम कर वापस अपने घर आते है,
घर पहुचते ही वापस मनसुख भाई अपने काम धंधे पर चढ़ जाते है,मेहुल और आरोही भी अपनी पढाई करने लगते है,
एक दिन रातको मेहुल ने सोचा की क्यों ना में वो आरोही की चिठ्ठी मम्मी-पापा को दिखाऊ,
फिर मेहुल,आरोही के बैग से चिठ्ठी निकलता है,तभी उसके पापा बोले अरे मेहुल तुम आरोही के बैग में क्या ढूंढ रहे हो,मेहुल बोला पापा मुझे आपको एक चीज देखानी है,मनसुख भाई बोले अरे बेटा कोनसी चीज दिखानी है,मेहुल बोला पापा आप कितने सवाल पूछोंगे 2 मिनट रुकिए ना, अभी पता चल जाएगा कि में आपको क्या दिखाना चाहता हु,तभी वहा आरोही आ जाती है,आरोही,मेहुल को बोली तुम मेरा बैग क्यों चेक कर रहे हो,मेहुल बोला 2 मिनट तुम भी रुको में मम्मी-पापा को एक चीज दिखाना चाहता हु,तभी आरोही तुरन्त समझ गयी की शायद भैया ने वो सारी चिठ्ठी पढ़ ली है,और वो पापा को दिखाने जा रहे है,तभी आरोही अपने पापा को कहती है,की पापा आप भैया को समजाइये की मेरा बेग चेक न करे,तभी मनसुख भाई बोले अरे इसमें क्या है,चेक करने दो ना तुम्हारा बैग।

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तभी मेहुल बोला yes मिल गयी चिठ्ठी,ये सुनकर मनसुख भाई बोले अरे मेहुल कोनसी चिठ्ठी मिल गयी,और अब तक तुम आरोही के बैग में ये चिठ्ठ ढूंढ़ रहा था,मेहुल बोला हा पापा में ये चिठ्ठी ढूंढ रहा था,और में ये चिठ्ठी आप सबको दिखाना चाहता हु,तभी वहा मेहुल और आरोही की मम्मी कोकिला बेन आ गए और बोले अरे मेहुल तुम कोनसी चिठ्ठी हम सबको दिखाना चाहते हो,मेहुल बोला ले लीजिए पापा पहले आप ही ये चिठ्ठी पढ़ लीजिये,फिर मनसुख भाई , मेहुल के हाथ से वो चिठ्ठी लेते है,और पढ़ना शरू करते है,
मनसुख भाई उस चिठ्ठी में पढ़ते है,की
"प्रेम एक प्राथना से भी ऊपर की अवस्था है"
ये पढ़कर पहेले तो मनसुख भाई और कोकिला बेन हँसे,और बोले आरोही बेटा ये सब क्या है,तुमने तूम स्कूल में पढाई करने जाती हो या ये सब चिठ्ठी लिखने,आरोही कुछ नही बोल पाई,फिर मनसुख भाई ने चिठ्ठी में दूसरी लाइन पढ़ी की,
"पहेले हम दोस्त बने,
फिर gf bf बने,
फिर trust आया,
फिर break up हुआ,
और हम अलग हो गए,
क्या यही प्यार है,हमारा।"
ये पढ़कर मनसुख भाई और माधवी बेन और जोर जोर से हँसे और बोले बेटा ये सब क्या,लेकिन आरोही उनके मम्मी कोकिला बेन का एक भी जवाब नही दे शकी और रोने लगी।

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तभी मेहुल बोला मम्मी ये तो कुछ नही आरोही की वह दोस्त मनाली है,ना वो भी ऐसी ऐसी बाते लिखती है,एक बार आरोही उसकी डायरी अपने घर लेकर आई थी,मेने वो डायरी पापा को दिखाने की कोशिश की लेकिन मुझे वो डायरी नही मिली,और पापा ने मुझे डाट दिया,
और मुझे आरोही की दोस्त मनाली बिलकुल नही पसंद वो सब ऐसी बकवास बाते ही लिखती है,
फिर मनसुख भाई ने दूसरा page पढ़ा,और उसमें लिखा था कि,
" अगर तुम मुझसे प्यार करते हो,तो सबसे पहले हम दोनों अपने ऊपर विश्वास करना,पड़ेगा अगर विश्वास नही है तो प्यार भी नही है "
ये पढ़कर मनसुख भाई बोले अरे मेरी भोली आरोही तुम्हे ये सब करके क्या मिलता है,और तुम ये सब किसे भेजती हो,
आरोही कुछ नही बोल पाई और रोने जैसी हो गयी,तभी मेहुल बोला पापा ये सब गन्दी गन्दी फिल्मे देख कर हुआ है,ये सुनकर मनसुख भाई बोले मेहुल तुम चुप रहो,में आरोही से बात कर रहा हु ना,
फिर मनसुख भाई थोड़ा परेशान होकर बोले आरोही बेटा इधर आओ,अरे रोने का नय तुम्हे कोई कुछ नही कहेगा,
हम तुमको स्कूल में पढाई करने के लिए भेजते है,और तुम स्कूल में ऐसी ऐसी बाते लिखती हो,क्या ये सही बात है।

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माना जमाना अब मॉडल हो चूका है,लेकिन परिवार के संस्कार कभी भूलने नही चाहिए बेटा,
और मेरी एक बात तुम हमेशा याद रखना की,
" बेटे को ऐसे जिन चाहिए की अपने बाप को किसीके सामने हाथ फैलाने न पड़े,और बेटी यो को ऐसे जिन चाहिए की अपने माँ-बाप का सर नीचे न जुक जाए "
समजि बेटा, चलो अब रोना बंद करो,और में ये सारी चिठ्ठी फाड़ दू ना, आरोही बोली हां फाड़ दीजिये,आज से में कभी ऐसी बाते नही लिखूंगी,
फिर मनसुख भाई बोले बेटा तुम्हे मुझे एक वचन देना होगा की आज से मतलब अभी तुम तुम्हारी दोस्त आरोही से नही मीलोंगी और उससे दोस्ती भी नही करोगी,ये सुनके आरोही बोली पापा में आपको वचन देती हूं,आजसे में मनाली के साथ नही रहूंगी,और उससे दोस्ती भी माही करूँगी,
अब में सिर्फ पढाई ही करुँगी मुझे अब फ़ोन भी नही चाहिए,ये सुनकर मनसुख भाई और कोकिला बेन साथ में बोले ये हुई ना बात।

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और बेटा तुमसे एक बात और करनी है,तुम्हे अपने आप को भाग्यशाली मानना चाहिए,क्योकि ऐसे कितने बच्चे है जो पढ़ना तो चाहते है,लेकिन पैसो की कमी के कारण पढ़ नही पाते तुम्हे पढ़ने को मिला है,इसीलिए जी लगाकर पढ़ना ठीक है बेटा,आरोही बोली ठीक है,अब में पढाई करने जाऊ, और sorry ये चिठ्ठी के लिए,मनसुख भाई बोले अरे कोई बात नहीं तुम्हे समज में आ गया ये ही सबसे बड़ी बात है,और चलो हम सब पहेले खाना खा लेते है बादमे तुम पढाई करने बैठना,आरोही बोली ठीक है पापा, फिर पूरा परिवार खाना खाने बैठता है,
"अंत भला तो सब भला"। 

बोध ) - दोस्तों अभी आपकी उम्र career बनाने की है,इसीलिए अपने career बनाने में ध्यान दो,अगर इस छोटी सी उम्र में प्यार या ये सब करोंगे तो बादमे बहुत ही पछताना पड़ेगा।
18 से 25 की उम्र हमारे career बनाने की होती है,
" और अपने मन की सुनो लेकिन इतना भी मत सुनो की आपका करियर ख़त्म हो जाए "

और ऐसे ही हमारी Family story in hindi की कहानी यहाँ पर ख़त्म होती है आप comment करके जरूर बताइयेगा की आपको हमारी ये Family story in hindi कहानी कैसी लगी,
अगली कहानी में फिर मिलूंगा तब तक के लिए "अलविदा"।

और आप पढाई में ध्यान देना " प्यार बयार सब व्हेम है,पढाई करलो अभी भी समय  है "

                                 कहानी पढ़ने के लिए धन्यवाद

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