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Wednesday, October 23, 2019

जादुई तोता - moral story in parrot for kids

moral story for kids 

Hello dosto,आज मे आपके लिए बहुत ही अच्छी moral story for kids  लेकर आया हु जिसे पढ़कर आपको मजा आ जाएगा।

moral story for kids start 

ये कहानी moral story for kids  की है,ये कहानी है,एक 10 साल के बच्चे की जिसका नाम था राजू।
राजू एक दिन school से वापस घर आ रहा था भीगते-भीगते,तभी वहाँ पर बारिश हो रही थी।उसको एक तोता दिखा,जो उड़ नही पा रहा था,और बारिश में भीग भी रहा था।
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जादुई तोता (moral story in hindi)

राजू को उस तोते पर दया आ गई और अपने मनमे बोला शायद ये तोता उड़ नही पा रहा,और ये तोता है,भी बहुत छोटा सा क्यो ना में उसे अपने घर ले जाऊ, सब इसे देखकर खुश हो जाएंगे।
फिर राजू उस तोते को अपने घर ले जाता है।
राजू जैसे ही अपने घर पर पहुचा, और उसकी दादी ने बोला अरे राजू बेटा इस तोते को क्यो लेकर आया।राजू बोला दादीमाँ ये तोता बारिश में भीग रहा था,और ये उड़ भी नही सकता था,
इसीलिए मुझे इसको देखकर दया आ गई, और में इसे अपने घर पे ले आया,मेरे कुछ गलत तो नही किया ना दादी माँ।

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दादी माँ बोली अरे मेरे नन्हे से पोते तूने कुछ भी गलत नही किया,बिल्कुल ही सही किया है,अब चलो तुम कितने भीग गए हो,चलो अब जल्दी से अपने कपड़े change करलो। फिर में तुम्हे खाना दे देती हूं,ठीक है।
राजू बोला ठीक है, दादी माँ वैसे भी मुजे बहुत भुख लगी है।
फिर राजू कपड़े change करके खाना खाने बैठता है,राजू साथ-साथ उस तोते को भी खाना खिलाता है,लेकिन तोता खाना नही खाता।
ये देखकर राजू बहुत ही नर्वस हो जाता हैं।और उसकी दादी माँ से कहता है,देखो ना दादी माँ ये मेरा तोता खाना ही नही,खाता।

दादीमाँ बोले अरे राजू बेटा शायद उस तोते को भूख नही लगि होगी,बादमे कभी खा लेगा।
ये सुनकर राजू बोला,आपने बात तो सही की में इसे कल सुबह खाना खिलाऊंगा।
फिर रातको राजू अपने तोते को अपने पास सुला कर सो जाता है।
फिर सुबह होती है,राजू तोते को देखकर बोला अरे मेरा तोता जाग गया,तोता कुछ भी बोल नही था,राजू ये देखकर निराश हो जाता है।और अपने दादीमाँ से कहता है,की देखो ना दादी माँ ये तोता मेरे साथ बोल भी नही रहा।

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दादी माँ बोले शायद तुम उसे कल से तोता-तोता ही कह रहे हो इसीलिए वो तुमसे बात नही करता,एक काम करो उस तोते का एक बहुत ही अच्छा नाम रखदो।
राजू बोला ये बात आपने बहोत ही बढ़िया की,में अभी उस तोते के लिए बढ़िया से नाम ढूंढता हु।
फिर राजू बहुत ही महेनत करके उस तोते के लिए नाम रखता है,राजू ने उस तोते के लिए बिट्टू नाम पसन्द किया।
फिर राजू फिरसे अपनी दादी माँ के पास गया और बोला,की दादीमाँ उस तोते के लिए बिट्टू नाम कैसा है,दादी माँ बोली अरे बिल्कुल मस्त नाम है।
तुम उस तोते का नाम बिट्टू ही रखना।

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फिर राजू वापस उस तोते के पास जाता है,और बोलता है,पता है,आज मेने और मेरे दादिने तुम्हारा नाम रखा,है क्या नाम रखा है सुन्ना चाहते हो,तो सुनो मेने और मेरे दादिने तुम्हारा नाम बिट्टू रखा है,पसन्द आया तुम्हे अब से हम तुम्हे बिट्टू कह कर ही बुलायेंगे ठीक है।
फिर राजू school चला जाता है।
School से वापस आने के बाद राजू बिट्टू-बिट्टू चिल्लता है,लेकिन बिट्टू कहि नही मिला।
फिर राजू अपनी दादीमाँ के पास गया और बोला दादी माँ आपने मेरे बिट्टू को देखा,में कबसे उसे ढूंढ रहा हु।
दादीमाँ बोली अरे तुम पहेले श्वास तो लो,तुम्हारे बिट्टू को कुछ नही हुआ है,देखो वो मेरे कमरे में खाना खा रहा है,फिर राजू अपनी दादी माँ के कमरे में जाता है।और देखता है,की बिट्टू खाना खा रहा है,ये देखकर राजू बेहद ही खुश हो जाता है,और बिट्टू से कहता है,की अच्छा तुम खाना खा रहे हो,खाओ-खाओ लेकिन कहि जाना मत में अपना home-work करके तुम्हारे साथ खेलूंगा ठीक है।

फिर राजू अपना home work करने बैठ जाता है,और कब home work करते-करते राजू सो गया,ये राजू को भी पता नही चला।
फिर अगले दिन सुबह दादीमाँ राजू को ढूंढती है।लेकिन राजू कहि नही मिला, दादीमाँ को लगा शायद राजू अभीभी सो रहा होंगा,चलो उसे जगाकर आती हु।
फिर दादीमाँ राजू को जगाने के लिए राजू के कमरे में जाते है,और देखते है कि राजू अभी तक सो ही रहा है।फर दादीमाँ राजू को जगाते है,लेकिन दादीमाँ ने जैसे ही अपने पोते राजू को touch किया,वैसे दादीमाँ को राजू बहुत ही गरम लगा,दादीमाँ को लगा जरूर मेरे पोते को बुखार चढ़ गया है।

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ये सब बिट्टू देख रहा था।फिर दादी अपने पोते राजू को उठाती है,और बोलती है कि,अरे राजू बेटा तुम्हे तो बहोत ही ज्यादा बुखार हो गया,है चलो हम डॉक्टर के पास जाकर दवाई ले आते है।राजू बोला ठीक है दादीमाँ में पहेले नाह लेता हूं।दादीमाँ बोले ठीक है,तुम पहेले नाह लो बादमे हम तुम्हारी दवाई लेने एक बढ़िया से डॉक्टर के पास जाते है।
राजू बोला ठीक है।
फिर राजू नाह धो कर बाहर आता है,और अपने दादीमाँ से कहता है,दादीमाँ में ने अब नाह लिया है,अब चलो हम डॉक्टर के पास हमारी दवाई लेने जाते है।
फिर दादी और उसका पोता राजू दवाई लेने एक अच्छे से डॉक्टर के पास जाते है।

फिर डॉक्टर ने राजू को पूछा बेटा तुम्हे क्या तकलीफ हो रही है,राजू बोला डॉक्टर साहब मुजे कल रात से बुखार आ गया है।डॉक्टर बोले कोई बात नही में जो दवाई लिख देता हूं,उसे medical से ले लेना और समयसर खाते रहना
तुम्हारा बुखार यू चला जाएगा।
राजू बोला ठीक है,डॉक्टर साहब।
फिर राजू और राजू के दादीमाँ दवाई लेकर अपने घर की और प्रस्थान करते है।

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घर पर पहोचते ही दादीमाँ राजू के लिये खाना बनाती है,और राजू को खाना देती है।
दादीमाँ ने राजू को कहा राजू बेटा तुम खाना खाकर ये दवाई खा लेना ठीक है,राजू बोला ठीक है,दादीमाँ।
फिर दादी माँ वहाँ से थोड़ी मिर्च लेकर बिट्टू को देती है,खाने के लिए फिर बिट्टू मिर्च खा लेता है।
फिर राजू अपनी दवाई खा कर सो जाता है,लेकिन राजू का बुखार उतरने के नाम ही नही ले रहा था।ऐसे करते-करते राजू के बुखार का 1 महीना निकल गया,लेकिन राजू का बुखार उतरा ही नही।
ये देखकर राजू कि दादीमाँ बेहद ही परेशान रहती थी।

एक दिन बिट्टू ने राजू को touch किया,जैसे ही बिट्टू ने राजू को touch किया वैसे ही राजू का बुखार गायब हो गया,और राजू वापस पहले की तरह हस्ता खेलता हो गया।ये देखकर राजू और राजू की दादीमाँ को आश्चय होता है,की हमने गाँव के सबसे अच्छे डॉक्टर को दिखाया फिरभी तुम्हारा बुखार नही उतरा, लेकिन बिट्टू के एक touch से तुम्हारा सारा बुखार उतर गया।ऐसा तो क्या किया बिट्टू ने।

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ये सुनकर बिट्टू बोला,में एक जादुई तोता हु,जैसे ही बिट्टू बोला कि में एक जादुई तोता हु ये देखकर राजू और राजू की दादीमाँ चौक गए,और बोले बिट्टू तुम बोल सकते है।
बिट्टू बोला जी हां में बोल भी सकता हु,और सब सुन भी सकता हु और में महसूस भी कर सकता हु,में एक जादुई तोता हु,मुजे देखना बहुत ही दुर्लभ होता,मेरा जन्म 100 वर्षो में केवल एक ही बार होता है।
में इतने दिनों से इसलिए नही बोल रहा था,क्योकि मुजे लगा कि में अगर आपको अपनी सच्चाई बता दूंगा तो आप मेरा गलत फायदा उठाएंगे,इसीलिए मैंने ये बात आपको पहेले नही बताई।
अब में जब तक यहाँ पर हु तब तक आपको
किसी भी प्रकारकी तकलीफ नही होंगी।

ये सुनकर राजू बोला क्यो बिट्टू तुम कहि चले जाने वाले हो।बिट्टू बोला जिस दिन तुमने मुजे उस बारिश में उठा कर अपने घर लाया तब में उस दिन अपनी माँ का इंतजार कर रहा था, मेरी माँ मेरे लिए खाना ढूंढने गई थी,लेकिन मेने बहुत देर मेरी माँ का इंतजार किया,लेकिन मेरी माँ नही आई,इतने में तुम मुझे उठाकर अपने घर पर ले आए।में आपका बहुत ही आभारी हूं।
अगर तुम मुजे वहां से नही उठाते तो कोई और दुष्ट मुजे उठाकर मेरा गलत फायदा उठाता।
आपका बहुत बहुत धन्यवाद।
ये सुनकर राजू और राजू की दादीमाँ बोले अरे इसमें धन्यवाद क्या ये तो हमारा फर्ज था।

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राजू बोला हम तुम्हारी माँ को अवश्य ढूंढेंगे,लेकिन जब तुम्हारी माँ मिल जाएंगी तब तुम हमे मिलने तो आओगे ना।बिट्टू बोला अरे बिल्कुल आऊंगा,आज से हम सबसे अच्छे दोस्त ठीक है,राजू बोला ठीक है।
फिर राजू और बिट्टू दोनो साथ खेलते थे,साथ
में खाना खाते थे,मतलब दोनो बेहद ही खुश थे।
एक दिन बिट्टू रोने लगा,राजू ने बिट्टू से कहा अरे तुम रो क्यो रहे,किसीने तुम्हे डाटा बताओ तो सही।
बिट्टू बोला मुझे मेरी माँ की याद आ रही है।ये सुनकर राजू बोला हा हम तुम्हारी माँ को ढूंढ की रहे है,तुम्हारी माँ हमे जल्द ही मिलजाएँगी, ठीक है,चलो अब हँस भी दो।
फिर बिट्टू थोड़ा सा मुस्कुराता है,और राजू को कहता है,चलो अब खेलने नही जाना।ये सुनकर राजू बोला ये हुई ना बात,चलो खेलने जाते है।

फिर अगली सुबह बिट्टू ने राजू को कहा राजू में जरा बहार घूम कर आता हूं,राजू बोला लेकिन जल्दी वापस आ जाना,में जब school से वापस आउ तब तुम मुजे घर पर हाजर होने चाहिए।ये सुनकर बिट्टू जरा हसके बोला जी मेरे मालिक।ये सुनकर राजू भी जरा हसकर बोला अब जाओ भी घूमने, लेकिन जल्दी वापस आना ठीक है।बिट्टू बोला ठीक है।

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फिर बिट्टू बहार घूमने चल पड़ता है।और राजू अपने school चल पड़ता है,।बिट्टू को उड़ते-उड़ते पानी की तरस लगी और बिट्टू पानी ढूंढने लग गया,बहुत महेनत करने के बाद बिट्टू को पानी मिल गया,और वहाँ जाके पानी पीने लगा,और जैसे ही बिट्टू पानी पी रहा था वहाँ एक 12 साल का लड़का अनिल आया,अनिल मनमे बोला wow ये तोता कितना अच्छा है,क्यो ना में उसे अपने घर पर ले जाऊ, वैसे अनिल,राजू का पक्का दोस्त था,लेकिन ये बात बिट्टू को पता नही थी,की राजू,अनिल का पक्का दोस्त है।

फिर बिट्टू को लगा कि ये बच्चा शायद मुजे पकड़ लेगा, जैसे वो मुजे पकड़े वैसे में यहाँ से उड़ जाता हूं।लेकिन वैसा बिल्कुल नही हुआ,जैसे बिट्टू उड़ने गया,उस्से पहले ही अनिल ने बिट्टू को पकड़ लिया,और उसके घर ले गया,बिट्टू परेशान होने लगा और अपने मनमे बोलने लगा कि ये क्या कर दिया मेने अब राजू भी परेशान होगा,मुझे यहाँ पानी पीने आना ही नही था।
फिर अनिल अपने घर पहुचा और अपने परिवार को बिट्टू से मिलाया,अनिल की मम्मी बोली अरे बेटा ये तोता तू कहा से ले आया।
अनिल बोला वो मम्मी ये तोता हमारे छत पर पानी पी रहा था,और ये में देख गया।
और मुजे ये तोता पसंद आ गया,इसीलिए में इसे यहा अपने घर ले आया।

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अनिल की मम्मी बोली अनिल बेटा तुमने ये बहुत ही गलत किया।अनिल आश्चय से बोला मम्मी मेने इसमें गलत क्या किया।अनिल की मम्मी बोली अगर इस तोते का मालिक इसे ढूंढ रहा होगा,तो अगर इसके मालिक ये तोता नही मिला तो वो परेशान होगा ना,तुम मुझसे वादा करो,जैसे ही हमे इस तोते का मालिक मिल जाएगा, तुम उसे ये तोता वापस कर दोंगे।
अनिल बोला ठीक है मम्मी जब हमें इस तोते का मालिक मिलेंगा,तब में उसे ये तोता दे दूंगा,लेकिन अब तो में इस तोते के साथ खेलुना।अनिल की मम्मी बोली बिल्कुल खेलो,और इस नन्हे से तोते को मिर्च भी खिलाना ठीक है।अनिल बोला ठीक है, मम्मी।

फिर राजू school से वापस आता है,और बिट्टू बिट्टू चिलाने लगता है,ये सुनकर राजू की दादीमाँ बोली राजू बिट्टू अभी तक घर नही आया,ये सुनकर राजू चौक गया,और बोला क्या अभी तक बिट्टू घर पर नही आया मेने उसे बोला था,की में जब school से आउ तब तुम मुजे घर पर चाहिए,लेकिन अभी तक बिट्टू नही आया,ये सुनकर राजू की दादीमाँ बोली अरे बेटा इसमें इतना निराश क्यो हो रहे हो,तुम्हारा बिट्टू आ जाएगा,शायद उसे उड़ने में मजा आ गया होगा,इसिलए अभी तक नही आया,तुम्हारा बिट्टू शाम होने तक आ जाएगा ठीक है,तुम निराश मत हो।
फिर राजू दादीमाँ की बात मान कर अपने दिल को मना लेता है।

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फिर शाम हुई,लेकिन बिट्टू अभी तक घर नही आया,ये बात राजू अपनी दादीमाँ को बताता है,और ये सूनकर राजू की दादीमाँ बोली राजू अब तो मुझे भी बिट्टू की बहोत चिंता हो रही है।ये सुनकर राजू रोने लगता है,राजू को रोते देख दादीमाँ बोली राजू तुम रोओ मत में हुना, हम दोनों साथ मे मिलकर बिट्टू को ढूंढेंगे।
फिर राजू और राजू की दादीमाँ बिट्टू को ढूंढने के लिए बाहर निकल पड़ते है।और चिल्लाने लगते है,बिट्टू,बिट्टू कहा हो तुम वापस अपने घर आ जाओ।
लेकिन राजू और दादीमाँ को बिट्टू मिला ही नही,ऐसे करते-करते दो हप्ते निकल गए लेकिन बिट्टू का कोई अता पता ही नही चला,ये देखकर राजू और दादीमाँ बेहद ही दुखी रहते थे।

लेकिन अनिल को बिट्टू के साथ मजा आ गया,था बहोत ही खेलता था बिट्टू के साथ,लेकिन बिट्टू ,अनिल के घर कुछ भी नही बोलता था,वो सिर्फ यही सोच रहा था,की इस घर से बहार कैसे निकलू और राजू से कैसे मिलु।
तभी वहाँ अनिल की मम्मी आई और बोली अनिल बेटा इस तोते को हमारे गजर दो हप्ते जो गए है,इसका मालीक इसे ढूंढ रहा होगा,और परेशान भी हो रहा होगा,तुम इसे आज से आजाद करदो,अनिल बोला नही मम्मी ये तोता मुझे बहुत पसंद है,please मम्मी इस तोते को मेरे पास रहने दीजिए ना please.।
अनिल की मम्मी बोली बेटा ये बहुत ही गलत बात है,किसी के भी साथ ऐसा नही करते तुम ये तो सोचो जिसका ये तोता है,वो कितना परेशान होगा,अगर तुम्हें तोता चाहिए,तो हम तुम्हे दूसरा खरीद कर देंगे।

इस कहानी को पढ़कर आप हर मुश्केली का सामना कर पाएंगे|

अनिल बोला सचमे मम्मी आप मुजे नया तोता ले देंगे,तो में इस तोते को छोड़ दूंगा,फिर अनिल की मम्मी बोला अरे हा बाबा हम तुजे इससे भी बढ़िया तोता लाकर डेंगे ठीक है,अब तुम इस तोते को छोड़ दो।फिर अनिल उस तोते यानी बिट्टू को छोड़ देता है।
ये देखकर बिट्टू बहोत ही खुश होता है,और तुरन्त अपने राजू के पास जाता है।

जैसे ही बिट्टू,राजू के घर पहुचा,और राजू ने बिट्टू को देखा वैसे ही राजू खुशी के कारण पागल हो गया,और रोने भी लगा राजू,बिट्टू से कहने लगा कहा चला गया तू, मेने और दादी ने तुम्हे कितने ढूंढा पता है तुम्हे,चलो अब बताओ कहा चले गए थे तुम।
बिट्टू बोला में जब घूमने गया था, तब मुजे पानी की प्यास लगी थी,और में पानी पीने एक छत के नीचे बैठा।
और वही पर एक बच्चे ने मुझे पकड़ लिया।
ये सुनके राजू बोला उस बच्चे ने तुम्हे चोट तो नही पहुचाई ना, तुम्हारा ठीक से ख्याल तो रखा था ना।

बिट्टू बोला वो बच्चा बेहद ही प्यार था,उसने मुजे बिल्कुल भी चोट नही पहुचाई,और उस बच्चे का नाम अनिल था।
ये सुनते ही राजू बोला अनिल तो मेरा दोस्त है।
बिट्टू बोला क्या बात कर रहे हो तुम वैसे तुम्हारा दोस्त बेहद ही अच्छा था,मेरा बहोत अच्छे से ख्याल रख रहा था।
फिर राजू बोला फिर तुम यहाँ तक कैसे पहुचे।
बिट्टू बोला अनिल के मम्मी अनिल को बोले में तूम्हे नया तोता लाकर दूंगी,तुम इसे अब छोड़ दो,इसका मालिक परेशान हो रहा होगा,ऐसे करके अनिल ने मुझको छोड़ दिया और में यहाँ तक पहोच गया।
राजू बोला बहोत ही बढ़िया चलो अब खाना खालो,और मुजे छोड़ कर कभी मत जाना।
बिट्टू बोला अरे हा बाबा हा, अब मुजे खाना दो भूख लगी है।
फिर राजू और बिट्टू खाना खाकर सो जाते है।

ये भी भूतो वाली कहानी है इसे भी देखे|

फिर अगले दिन राजू बिट्टू के जैसे ही तोते को देखता है,ये देखकर राजू बिट्टू को बुलाता है।राजू बोला अरे बिट्टू जल्दी से यहाँ आओ।बिट्टू बोला क्या हुआ राजू क्या बात है,राजू बोला ये देखो बिल्कुल तुम्हारे जैसा तोता।
ये देखकर बिट्टू बोला ये मेरी माँ है।
फिर बिट्टू की माँ अपने बिट्टू के पास आती है,और राजू को धन्यवाद देती है,और बोलती है,की जब आपको मेरा बेटा बिट्टू मिला था,तब में उसके लिए खाना लेने गई थी,लेकिन कोई दुष्ट इंसान ने मुजे कैद कर लिया था।
आपका बेहद-बेहद धन्यवाद।

राजू बोला इसने धन्यवाद कैसा,ये तो मेरा फर्ज था,लेकिन बिट्टू अब तुम मुजे छोड़ कर चले जाओगे ना।बिट्टू बोला में तुमसे मिल ने आता रहूंगा ठीक है,अब में चलता हूं।राजू बोला अपना ख्याल रखना,फिर बिट्टू भी बोला तुम भी अपना ख्याल रखना।

और ऐसे ही हमारी moral story in parrot for kids  खत्म होती है, अगली कहानी में फिर मिलूंगा तब तक के लिए "अलविदा"

अपने सारे दोस्तो,और अपने सारे परिवार वालो 
को share कर दीजिये।

                 *कहानी पढ़ने के लिए धन्यवाद*

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