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Tuesday, September 10, 2019

purani kahani || पहले के दिन और आज के दिन

purani kahani in hindi


हेलो दोस्तो,आज में आपके लिए लेकर आया हु एक बढ़िया सी कहानी,ये कहानी है 1990 में जीवन कैसा था और अभी जीवन कैसा है,यानी कि 2019 में।
तो चलिए आप पढ़ना शरू कीजिये,और में लिखना शरू करता हु।


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- > 1990 एक ऐसा समय था,जब कोई भी इंसान अपने relatives को रेलवे-स्टेशन छोड़ने जाता था,तो उसकी आँखों मे से आंसू बहार निकल आते थे।
- > लेकिन अभी एक ऐसा समय है,जहा कोई इंसान मर भी जाता है,फिर भी इंसान की आँखों मे से एक बूंद का आँसू तक नही निकलता।

- > 1990 में सबके पास पैसे कम थे,लेकिन खुशिया ज्यादा थी।
**  लेकिन अब सबके पास पैसे तो है,मगर संतोष नही है,वो दुसरो को ही जर्ज करते रहता है,की उसके पास गाड़ी है,बड़ा घर है,वो किसीको अपने से आगे नही देख सकता ,और अपना पूरा जीवन दुसरो के साथ
Comparison में ही बीता देता है।

- > 1990 के बच्चे बहार खेलने में समय पसार करते थे और नए-नए खेल खेलते थे,जैसेकि
गीली-डंडा,भमरदा,लगोठि और कबड्डी जैसे और भी बहोत सारे खेल खेलते थे।
** लेकिन अभी के बच्चे mobile में game खेलने में समय पसार करते है,जैसे कि pub-g है और भी बहोत सारी game खेल कर अपनी आँखें खराब करते है।
purani-kahani
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- >1990 में सब परिवार के लड़के-लडकिया बुजुर्गों की इज्जत करना जानते थे।
** लेकिन अभी के लड़के-लडकिया बुजुर्गो की इज्जत करना नही जानते,उनको लगता है कि में पहेले से smart ही,हु मुझे किसी advice की जरूर नही है, मुजे सब कुछ आता ही है।ऐसा attitude रखने के बाद बादमे बहोत पछताते है।

- > 1990 में पढ़ाई-लिखाई कम जरूर थी,लेकिन उस जमाने के लोगो को सबकी परवाह जरूर थी।
** लेकिन अभी पढ़ाई-लिखाई तो बहोत ही ज्यादा है,लेकिन उसको किसी की परवाह नही होती,की मेरे relatives क्या कर रहे होंगे,चलो आज में उनको फोन करता हु,वो सिर्फ पैसे के पीछे ही भागता रहता है।

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- > 1990 में जब परिवार के लोग भर घूमने जाते थे,तब घर की चाबी अपने पदोश मे देकर जाते थे,और बोलते थे कि आपको किसी चीज की जरूरत हो तो हमारे घर से ले लीजिएगा।
- >लेकिन इस समय मे जब लोग बहार घूमने जाते है,और चाबी भी साथ मे ले जाते है,उनको लगता है,की उसने मेरे घर से कुछ चुरा लिया तो।मतलब की आज के जमाने के इंसान को किसी के भी ऊपर विश्वास नही है।

- > 1990 में बच्चे खेलने के लिए रोया करते थे।
- > और अभी के लड़के mobile खरीदने और mobile में game खेलने के लिए रोया करते है।
purani-kahani
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- > 1990 में सब परिवार एक साथ मिल-जुलकर कर हँसी-खुशी से रहते थे।
- > लेकिन अभी के सारे परिवार बिछड़ गए,और लड़ाई जगड़ा बढ़ गया।
माता-पिता गुजरात मे रहते है,और उसका बेटा और बहू पैसे कमाने के लिए कहि और गुजरात से बाहर रहते है।

- > 1990 के लोग दोस्ती बनाने में गरीबी और
अमीरी नही देखते थे,वो सिर्फ किसीको भी अपना दोस्त बनाना चाहते थे।
- > लेकिन इस समय में लोग दोस्ती सिर्फ उसीसे करते है,जिसके पास पैसा ज्यादा हो।और वो सिर्फ अमीरों को ही इज्जत से बुलाते है,किसी गरीब लड़के को बुलाते तक नही।

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- > 1990 में सबके घर ईश्वर थे,श्रध्धा थी था।
- > लेकिन इस समय में सबके घर ईश्वर तो है,लेकिन किसी को भी ईश्वर पर श्रध्धा नही है।

- >1990 में सब चैन की नींद से सो पाते थे,क्योकि उनके सर पर कोई भी तरह का पैसे का दबाव नही था,वो अपनी मस्ती में ही जीते थे।
- > लेकिन इस समय  में रात तो है,लेकिन किसीकी आखो में नींद नही है,क्योकि उसने सबके पास से पैसे उधार लिए होते है,इसीलिए।

- > 1990 में किसी के डिग्री नही थी,मगर वो कभी खाली नही बैठते थे,कुछ ना कुछ काम करते रहते थे।
** लेकिन अब सबके पास डिग्री तो है,लेकिन किसी के पास नोकरी नही है।सब खाली बैठे हुए है।

- > 1990 में सबके पास सम्पति नही थी,लेकिन शांति जरूर थी।
- > लेकि अब सबके पास सम्पति तो बहुत है,लेकिन किसीके पास शांति नही है।ये एक बहोत बड़ी हकीकत है।

- > 1990 में सबके परिवार थे,और सब परिवार का संप भी बहोत अच्छा था,मतलब दुसरो को दुःखी नही देख सकते थे।
- > लेकिन परिवार तो इस समय में भी है, लेकिन पहेले जैसा संप नही है।मतलब की दुसरो को दुःखी देख कर ये इंसान खुश होता है।
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- > 1990 में सतयुग था,और सब दुसरो की मदद करना जानते थे।
- > लेकिन अभी कलयुग चल रहा है,लोग दूसरों की मदद करना नही चाहता।

- > 1990 में सब सुंदर थे,लेकिन सुंदर के साथ सुशील और संस्कारी भी थे, उनको पता होता  था कि ये कपड़े कब और कहा पहरने चाहिए।
- > लेकिन इस समय में सुंदर तो सब है,लेकिन कोई सुशील और संस्कारी नही है।

भूतो वाली कहानी बहुत ही खतरनाख

- > 1990 में सबके business थे,और मुनाफे भी थे।
- > लेकिन इस समय मे business तो है,लेकिन मुनाफा नही है।

- > पहेले के जमाने मे सब लोग अपनी मातृभाषा ज्यादा बोलते थे।
- > और इस जमाने मे सब लोग अपनी मातृभाषा को भूलने लग गए है।और अपनी मातृ भाषा बोलने भी उनको शर्म आती है।

- > पहेले के समय मे लोगो का आयुष्य ज्यादा था,क्योकि वो सिर्फ घरका खाना  खाना ही पसन्द करते थे।
- > और इस समय मे किसीको भी घर का खाना पसंद ही नही है,सबको बहार का खाना ही पसन्द है।और छोटो-छोटी उम्र में डायबिटिश
और high blood pressure  जैसी बीमारियां होती है,और छोटी सी उम्र में उसकी मृत्यु हो जाती है।

प्रेणादायक कहानी

- > पहेले के समय मे सब लोग सुबह जल्दी उठा करते थे।
- > और इस समय मे किसी का कुछ निश्चय ही जब तक मन हो तब तक सोया करते है,और रातको 2-2 बजे सोते है।
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- > उस समय मे इंसान थे,लेकिन सब में इंसानियत नामकी चीज थी।
- > लेकिन इंसान इस समय मे भी है,लेकिन सब इंसानियत नाम की भी कोई चीज होती है,वो भूल गए।

हर घर की कहानी

- > उस समय मे किसी के घर महेमान आते थे,तो सब मिल-जुलकर सुख-दुःख की बाते करते थे।
- > लेकिन इस समय मे भी महेमान आते है, लेकिन सब के सब अपने फोन में चेटिंग करने में ही लग गए है।

मुझे तो कभी-कभी लगता है कि अच्छा हुआ कि मेरा जन्म इस WhatsApp और Facebook के जमाने मे नही हुआ,पहेले ही हो गया जब WhatsApp और facebook नही थे।

और ऐसे ही हमारी purani kahani यहाँ पर खत्म होती है।
अगली कहानी में फिर मिलूंगा तब तक के लिए
"अलविदा" दोस्तो।

आपको ये बाते केसी लगी आप मुझे comment करके जरूर बताइयेगा।

"जय हिंद"

                       *कहानी पढ़ने के लिए धन्यवाद*

1 comment:

  1. वाह बेहतरीन रचनाओं का संगम।एक से बढ़कर एक प्रस्तुति।
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