Motivational story for boy || बच्चे की प्रेणादायक कहानी - amjoys - हिंदी कहानीया

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Sunday, September 1, 2019

Motivational story for boy || बच्चे की प्रेणादायक कहानी

Motivational story 


हेलो दोस्तो! आज में आपके लिए एक प्रेणादायक मोटिवेशनल कहानी लेकर आया हु जिसे पढ़ कर आप हर एक परेशानी का solution निकाल पाएंगे।

Motivational story start

Motivational story
ANIL

ये कहानी है एक लड़के,की एक दम सुखी परिवार का किसी बात की कोई भी तकलीफ नही थी। मतलब दौलत,शौहरत, इज्जत सब कुछ था,उसके परिवार के पास,और उस लड़के का नाम था,अनिल।
अनिल अपने दादा-दादी को बेहद ही प्यारा था,
अनिल जो कुछ भी अपने दादा-दादी से मांगता था, उसके दादा-दादी अनिल को वो चीज तुरन्त ही दिलवा देते थे।
अनिल बचपन मे कभी रोया ही नही था,क्योकि उसको किसी ने रोने ही नही दिया था,उसके मम्मी-पापा अनिल के दादा-दादी, चाचा-चाची
सब उसे बेहद ही प्यार करते थे।

अब अनिल धीरे-धीरे बड़ा होता जा रहा था।अनिल जहा पर रहता था,वहाँ किसीने video game नही देखी थी,लेकिन अनिल के पास चार-चार video game थी।लेकिन वो इसका  घमंड नही करता था,सबको खेलने देता था किसी को भी मना नही करता,और अनिल के अडोश-पदोश में किसी के भी पास सायकल नही थी,लेकिन अनिल के पास एक बढ़िया सी छोटी सी सायकल थी,और उसके चाचा के पास एक स्कूटी थी।

मतलब की सब कुछ अच्छे से चल रहा था,लेकिन वो कहते है,खुशी जिंदगी भर नही रहेती,जिंदगी में गम तो आता ही है। अनिल के दादी माँ बीमार पड़ने लड़ गए,और जब डॉक्टर पास इलाज के लिए गए तो डॉक्टर ने कहा कि इनको कैंसर है,ये सुनके सब दंग रह गए,अनिल को ये सब पता नही होता क्योंकि वो अभी सिर्फ 7 वी क्लास में ही था।
फिर अनिल के मम्मी-पापा का business भी ठीक से नही चल रहा था,दिन-ब-दिन खोट आती जाती है और ऊपर से अनिल के दादी माँ की दवा का खर्च। इन सब के चक्कर मे अनिल के मम्मी-पापा अनिल के स्कूल की फीस देना ही भुल जाते है,औऱ अनिल को स्कूल से निकाल देते है,अनिल प्राइवेट स्कूल में पढ़ता था।

हँसाने वाली कहानी

अनिल ने उसके पापा को बोला पापा मुझे स्कूल से निकाल दिया बोला कि जब तुम स्कूल की फीस भरोंगे तभी हम तुम्हें बैठने देंगे।लेकिन
अनिल के पापा और चाचा के सारे पैसे दादी को दवा में और business में खोट होने में चले जाते है।अनिल ने ये बात अपने दादा जी को बताई की मुझे स्कूल से निकाल है,क्योकि मेरी फीस नही दी है ना इसीलिए,के सुनके अनिल के दादा ने उसके मित्र के पास से कुछ पैसे उधार लिए और अनिल की फीस दी।
Motivational story
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अनिल के दादी की हालत दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही थी,अनिल की अब आठवी कक्षा शरू हो गई थी और आठवी कक्षा के 3 महीने खत्म हो गए थे। लेकिन अनिल की दादी माँ इस दुनिया को छोड़ कर चले गए,ये सदमा पूरा परिवार सहन नही कर पाया,अनिल को भी ये सदमा लग गया।क्योंकि वो अब समझदार होता जा रहा था। फिर अनिल अपने दादी को अंतिम संस्कार देता है।सब परिवार बहोत ही दुखी थे ऊपर से business में दिन ब दिन खोट आती जा रही थी। फिरसे अनिल को स्कूल से निकाल दिया क्योकि उसने फीस नही दी थी।ये बात उसके पापा को बताई,पापा ने बोला तुम दो दिन तक स्कूल नही जाना मेरे अभी तुम्हारी फीस के पैसे नही है।अनिल बोला ठीक है पापा में दो दिन के बाद चला जाऊंगा।

धीरे-धीरे दिन पसार होते जा रहे थे,लेकिन हालात वैसे के वैसे ही थी घर मे पैसों के कारण जगडा होने लगता है,अनिल अब दसवीं क्लास में आगया था जैसे तैसे करके उसके पापा अनिल की स्कूल की फीस भरते थे।लेकिन पैसे की कमी अभी भी थी।
ये बात अनिल के दादा पर चढ़ जाती है,पैसे है नही,business चल नही रहा,मतलब की अनिल के दादा टेंशन लेने लग गए,और इसीके
कारण वो बीमार पड जाते है।और कुछ दिनों के बाद अनिल के दादा भी इस दुनिया से चल बस्ते है,इस बात का अनिल को भयंकर सदमा लगा क्योकि वो अपने दादा-दादी से बेहद प्यार करता था, और उसके दादा-दादी को अपनी के बगैर एक पल भी नही चलता था।फिर अनिल अपने दादा जी का अंतिम संस्कार करता है।

दिन बीतते जा रहे थे,लेकिन बिज़नेस में कोई भी फेरफार नही हुआ,दिन-ब-दीन खोट बढ़ती जा रही थी,खराब नसीब के कारण अनिल के पापा ने अपना बिज़नेस बंध कर दिया और 6000 कि नौकरी करने लग गए।जो इंसान कुछ जमाने पहले महीने का 60,000 कमाता था,वो आज सिर्फ 6000 की नौकरी कर रहा है।अनिल के साथ फिरसे वही हुआ जो पहेले हुआ था,उसको 10 वी क्लास में बोर्ड की हॉल टिकिट नही दी क्योकि अनिल ने स्कूल की फीस नही दी थी।ये बात अनिल ने उसके पापा को बताई पापा मुझे स्कूल वाले हॉल टिकिट नही दे रहे है,क्योकि मेरी स्कूल फीस बाकी है ना इसीलिए,अनिल के पापा कही से भी पैसे का इंतजाम करते है,और अनिल की फीस भरते है।

कुछ और कहानी जिसे पढ़कर आपका दिल खुश हो जाएगा

सभी परिवार वाले अनिल और अनिल के परिवार का मजाक उड़ाने लगता है,की जो लड़के के पास सब कुछ था,आज उसके पास अपनी फीस भरने की औकात नही है,अनिल के पापा को भी सब चिढाने लगे देखो क्या हालत हो गई है तुम्हारी,जो इंसान दिन दो बार कपड़े बदलता था,वो आज फटे हुए कपड़ो में काम पर आता है।ऐसी-ऐसी सब बात करने लगते है।

ये सब उसके पापा से बर्दाश्त नही हो रहा था फिरभी ये सब सहन करते थे।फिर अनिल का दसवीं का रिजल्ट आया,और अनिल अच्छी तरह से पास हो गया,फिर अनिल ने बहोत सोच कर science field ले ली,उसके पापा जहा पर जॉब करते थे वो जॉब उन्होंने छोड़ दी,वो वापस अपने पहेले के बिज़नेस में आना चाहते थे,6 महीने business धीरे-धीरे चला लेकिन उसके बाद अनिल के पापा के बिज़नेस ने बुलंदिया छूनी शरू कर दी।
और अनिल के घर की परिस्थिति वापस पहेले जैसी अच्छी होने लगती है।
जो लोग अनिल और अनिल के पापा का मजाक उड़ाते थे वो आज दोनो की इज्जत करते है।

अनिल की अब स्कूल फीस भी time-to-time हो जाती थी।फिर अनिल 12 साइंस में आया और अनिल ने 12 साइंस भी बहोत ही अच्छे मार्क्स से पास कर लिया,लेकिन अनिल अपने दादा-दादी को याद करके उसकी आँखें अभी भी पानी आ जाता था।
12 साइंस पास करके अनिल ने इंजीनियरिंग लेने का सोचा।और अच्छी तरह से इंजीनियरिंग में ऐडमिशन मिल जाता है।
और अनिल के पापा का बिज़नेस भी तेज गति से चल रहा था।मतलब की पूरी तरह से सब लोग खुश थे पहेले की तरह।अनिल भी अब इंजीनियरिंग की पढ़ाई में लगा पढ़ने लगता है।

बोध ) - दोस्तो,आपकी परेशानी कितनी भी हो
           कभी हार न माने आपका समय किसी
           भी वक्त बदल सकता है,इसीलिए
           निराश मत होइये, ईश्वर जो भी करते है
          वो हमारे अच्छे के लिए ही करते है।

और ऐसे ही हमारी motivational story वाली  कहानी खत्म होती है।

अगली कहानी में फिर मिलूंगा तब तक के लिए
अलविदा दोस्तो

                         *कहानी पढ़ने के लिए धन्यवाद*

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