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Monday, September 2, 2019

funny story in hindi || funny story in hindi with moral

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हेलो दोस्तो,आज में आपके लिए फिरसे नई कॉमेडी कहानी लेकर आ गया हूं,जिसे पढ़ने के बाद आपकी हँसी नही रुकेंगी,मेरा वादा है आपसे।

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funny story in hindi with moral
Family

ये कहानी है एक परिवार की,पूरा का पूरा परिवार एक नंबर का आइटम था। (आइटम का मतलब एक नंबर का मस्ती खोर परिवार था।)
उस परिवार में दो बेटे, और दोनो के मम्मी-पापा
रहते थे।बड़े बेटे का नाम महेश था,और छोटे बेटे का नाम रमेश था दोनो सरारती एक नंबर के।
एक बार रमेश,और महेश के पापा ने सोचा कि क्यो ना में मरने की एक्टिंग करू,देखता हूं मेरे मरने के बाद ये लोग क्या करते है।
महेश के पापा का नाम चंदूभाई था,और उसकी मम्मी का नाम भावना बेन था।
फिर चंदूभाई ने जोरसे आवाज लगाई भावना,महेश और रमेश इतना बोलते ही तीनो एक दम से हाजिर,फिर चंदूभाई बोले मुझे लगता है,अब में कल का सूरज नही देख पाऊंगा,भावना बेन बोले हाय-हाय आप इस क्यो बोल रहे है,महेशया जल्दी से डॉक्टर को फोन कर और रमेशया तुम अपने पापा के लिए पानी का ग्यास भरके ले आओ।

चंदूभाई बोले पहेले तुम तीनो मेरी पूरी बात सुनो मेरे मरने के बाद वो पेटी मत खोलना,भावना बेन बोले क्यो,चंदूभाई ने बोला मेने कहा ना मेरे मरने के बाद वो पेटी नई खोलना, इतना कह कर चंदूभाई का जीव चला जाता है ( वो मरने की एक्टिम्ग कर रहे थे,सचमे नही मरे थे, वो देखना चाहते थे कि मेरे मरने के बाद बो पेटी को खोलते है या नही।)
रमेश बोला चलो पापा तो अभी चल बसे हम ये पेटी खोल कर देखते है,पता तो चले उसमे है क्या,महेश बोला नही यार पापा ने मना किया है,हम नही खोल सकते।फिर भावना बेन वो पेटी खोल ही डाली,पेटी खोलते ही उसमे से दूसरी पेटी निकली,रमेश बोला उसके अंदर से तो दूसरी पेटी निकली,महेश बोला सबको दिख रहा है,दूसरी पेटी निकली।
फिर भावना बेन वो दूसरी पेटी भी खोलते है,और दूसरी पेटी के अंदर से एक छोटी सी डब्बी निकली महेश बोला कि लगता है,पापा ने इसके अंदर हिरे छुपाये लगते है।

प्यार वाली कहानी बहुत ही दुखी कर देने वाली कहानी

भावना बेन बोले ગધેડા ચૂપ બેસ તું फिर भावना वो डब्बी खोलते है,और डब्बी में से एक चिठ्ठी निकलती है,और उस चिठ्ठी में लिखा होता है,की "मेरे मना करने के बावजूद भी तुम लोगो ने वो पेटी खोली"
इतना पढ़ते है चंदूभाई खड़े होते है
सब डर गए,सबको लगा कि चंदूभाई का भूत है,सब चिल्लाने लगे ,फिर चंदूभाई गुजराती में बोले,અરે ગધેડા ઓ હું તમારો બાપો જ છું,અને હું પતિ ચંદુ જ છું.
भावना बेन बोले आप तो मर गए थे ना फिरसे जिंदा कैसे हो गए,चंदूभाई बोले में मरा नही था,में देखना चाहता था।मेरे मरने के बाद तुम सब क्या करते हो,महेश बोला अरे कुछ नही पापा हमने क्या किया,चंदूभाई बोले ये पेटी क्या तेरे बाप ने खोली, महेश बोला सॉरी पापा।
चंदू भाई बोले अरे कोई बात नही ये सब तो होता रहता है,गधेड़ा।
और तुम भावना मेरे लिए एक गरम कड़क चाय बनाओ, भावना बेन बोले हा अभी बना कर आता हूं।

फिर दूसरे दिन भावना बेन न्यूज़ पेपर पढ़ रहे है,तभी वहाँ चंदूभाई आए और बोले अरे भावना कुछ खबर पढ़ कर सुनाओ,भावना बेन ने पढ़ना शरू किया और बोले,एक पति ने उसकी पत्नी को शॉपिंग करने से मना किया तो उसकी पत्नी ने उसका मर्डर कर दिया,ये सुनके चंदूभाई समज गए थे,की लगता है आज जेब खाली होने वाली है,फिर चंदूभाई बोले लाओ मुझे भी पढ़ने दो,भावना बेन बोले अरे why not ,फिर चंदूभाई पढ़ते-पढ़ते बोले एक पत्नी ने अपने पति को चाय बनाके नही दी इसीलिए पति ने पत्नी को डिवॉज दे दिया,ये सुनके भावना बेन तुरन्त ही चंदू भाई के हाथ से न्यूज़ पेपर छीन लेते है,और बोलते है कि बताइये मुझे कहा लिखा है इस कही पर भी,चंदू भाई बोले तो तुम भी मुजे ये बताओ कहा शॉपिंग वाला लिखा है।
चल जा अभी मेरे लिए एक कड़क चाय रख।
भावनाबेन बोले हा-हा रखती हूं,हर दिन बस चाय-चाय-चाय।
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dadi maa

सब लोग मजे से रह रहे थे लेकिन कहते है ना खुशिया पूरे जीवन नही रहती।
दुःख बात ये थे कि चंदूभाई के गजर उसकी सासु यानी कि भावना बेन की परम् पूज्य माता श्री रहने आ रही थी कुछ दिनों के लिए।
भावना बेन ने ये बात चंदू भाई और उसके दोनों बेटे को बताई,ये बात सुनके चंदू भाई बोले वापस क्यो आ रहे है अभी पिछले साल ही तो आई थी।भावना बेन क्यो इस साल भी आए तो आपको कोई प्रॉब्लम है।चंदूभाई धीरे से बोले अब तो प्रॉब्लम ही प्रॉब्लम है,उसकी पत्नी बोली क्या बोले आप,चंदूभाई बोले कुछ नही बोला में,भावना बेन बोले हा तो ठीक अगर कुछ भी टेड़ा-मेडा बोले ना तो आपके ढिंधे भांग दूंगी,चंदूभाई बोले हा मेरी माँ में कुछ टेड़ा-मेडा नही बोलूंगा खुश।

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फ़इर अगले दिन उड़की सासु मा आती है,और आते ही बीमार पड़ जाती है,ये देख कर चंदूभाई को बड़ा ही मजा आता था,चंदूभाई की सासु माँ बोली ओ चंदू कुमार डॉक्टर को बुलाओ और मेरा इलाज करवाओ,पता नही कैसे जमाई मिले है मुझे।फिर चंदू भी डॉक्टर को बुला कर आते है,और कहते है जरा मेरी सासू माँ को देखिए तो उनको छाती में बहोत ही दुख रहा है।
डॉक्टर बोले अरे कोई बात अभी एक दवा पीते ही गायब,भावना बेन बोले कोन मेरी माँ गायब,चंदूभाई बोले हा-हा डॉक्टर जल्दी से दावा देदो और गायब करदो,भावना बेन बोले क्या गायब करदो,डॉक्टर बोले अरे आप पहेले मेरी बात तो सुनो ये दवा खाकर आपके मम्मी जी का दर्द गायब हो जाएगा ऐसा।भावना बेन बोले ओ अच्छा तो ठीक है।

फिर डॉक्टर चंदुभाई की सासु माँ दवा देते है,और चले जाते है।लेकिन दो दिन तक इस दवा से कुछ फेर नही पड़ा।फिरसे चंदूभाई उस डॉक्टर को घर से उठाकर अपने घर पर लेकर आए, और बोले डॉक्टर साहब अभी तक कुछ फेर नही पड़ा।
डॉक्टर ने सोच कर बताया कि अब मुजे लगता है, की आपको कोई अच्छे से डॉक्टर को बताना चाहिए।भावना बेन बोले आप अच्छे डॉक्टर नही है,डॉक्टर बोले में तो ये डॉक्टर का काम पार्ट टाइम करता हूं,वैसे तो में एक इंजीनियर हु।ये सुनके चंदूभाई की सासु माँ का गुस्सा सातमे आसमान पर पहोचा और बोले।
चंदुकुमार मुझे तलवार दीजिये आज तो इसका मर्डर मेरे ही हाथों लिखा,साला इंजीनियर होकर
डॉक्टर का काम करता है,निकल जाए अभी के अभी यहाँ से वरना दो कान के बीच तेरा सिर कर दूंगा।
चंदूभाई बोले सासु माँ सबको दो कान के बीच ही अपना सिर होता है।भावना बेन बोले आप चुप रहिये,और ओ डॉक्टर,इंजीनियर तुम भी निकलो वरना यहा एक का मेरे हाथो मर्डर हो जाएगा।चंदुभाई बोले कोन सा इमरान हाशमी वाला मर्डर हो जाएगा।सासुमा बोली चंदुकुमार आप चुप ही रहिये,और ओ डॉक्टर,इंजीनियर जो भी हो निकलो यहा से।और वो डॉक्टर वहासे चला जाता है।

फिर सासु मा अपने पैरों पर खड़े हो जाते है।चंदूभाई बोले आप तो बीमार थे ना, सासु मा बोली मे कोई बीमार-फिमार नही थी।में तो सिर्फ देख रही थी आप मेरा कितना इलाज करवा सकते है।चंदुभाई धीरे से बोले साली मर गई होत तो अच्छा होता,भावना बेन बोले क्या बोले आप ,चंदुभाई-कुछ नही बोला में सासु मा अच्छे हो गए ना इसे देखकर खुश हूं।
सासु माँ बोली ह तो बरोबर।

थे ना एक से एक नंग,चंदुभाई, भावनाबेन,और महेश,रमेश और आधे में ज्यादा सासु माँ।

और आप क्या हस रहे है,अपने दोस्तों को share करे।

ऐसे ही हमारी funny story in hindi with moral खत्म होती है,अगली स्टोरी में आपसे फिरसे मुलाकात होगी तब तक के लिए "अलविदा"

                                           *कहानी पढ़ने के लिए धन्यवाद*

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